जिंदगी में सफल होने के लिए रिस्क लेना ज़रूरी है

असफलता के बाद उससे उबरना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन यदि यह मालूम हो की संघर्ष कहाँ और किससे करना है तो आसानी हो जाती है।

कोई भी काम करने से पहले उससे जुड़ी जानकारी सफल होने की संभावनाओं को बड़ा देती है। यदि हमारी सोच पॉज़िटिव है तो हम किसी भी चीज से इंस्पायर हो सकते है, रोजमर्रा की जिंदगी में किसी भी इंसान से। ज़रूरी नही है कि वह ऐसा इंसान हो जो बहुत ही परफेक्ट हो।

एक आदमी जो सुबह नौ से पाँच तक जॉब करता है और फिर भी डटा रहता है । वह भी हमे इंस्पायर कर सकता है कि वह जो भी करता है , उससे खुश होता है। एक बच्चा जो एक पल गिरता है और दूसरे ही पल फिर से खड़ा होकर चलने लगता है , कई बार गिरकर भी कोशिश करना नही छोड़ता है और फिर एक दिन दौड़ने लगता है । एक आर्टिस्ट के द्वारा किया गया काम भी हमे बहुत प्रेरित करता है फिर चाहे वह किसी भी फील्ड का क्यो ना हो । वो चाहे सफेद कैनवास पर रंगों से सुन्दर आकृति बनाता हो या मंच पर अलग अलग किरदार निभाता हो ।

कोई भी अहम फैसला लेते समय जरूरी होता है कि हमारे में स्पष्टता हो । हम खुद को लेकर जितने स्पष्ट होंगे,फैसला लेने मे उतनी ही आसानी होगी।

हमारे भीतर एक मौन ऊर्जा होती है, जो हमारी ऊर्जा को क्रिएटिविटी में बदलती है और हमारी सकारात्मक सोच हमे आगे बढ़ने के लिए हमारे अंदर और ज्यादा ऊर्जा भर देती है और हम लगातार प्रयास करते हैं जब तक कि सफल नही हो जाते ।

अनेक रोगों की एक औषधि तुलसी-

आयुर्वेद के अनुसार तुलसी की पत्तियाँ सर्वरोगनाशक हैं। इनका प्रयोग विभिन्न रोगों में कई प्रकार से किया जाता हैं। लेकिन तुलसी के इस्तेमाल के पहले रोगी की आयु, शक्ति, रोग की प्रकृति और मौसम को ध्यान में रखना चाहिए।

तुलसी की प्रकृति गर्म होती हैं, इसलिए गर्मी के मौसम में कम मात्रा और सर्दी में कुछ ज्यादा मात्रा लेनी चाहिए। अधिकतर रोगों में सामान्य रूप से 7 से 11 पत्तियाँ लेना पर्याप्त होता हैं

तुलसी लेने की सामान्य विधि –

-आवश्यकताअनुसार 7 से 21 हरी तुलसी की पत्तियों को साफ करके चटनी जैसा बना ले और इसमें शहद में मिलाकर लें सकते हैं

– तुलसी की पत्तियों का काढ़ा बनाकर भी लिया जा सकता है।

– यह खाली पेट ली जानी चाहिए उसके 1 घंटे बाद नाश्ता लें सकते हैं।

इसके साथ शाकाहारी प्राकृतिक भोजन करना चाहिए और तेज मिर्च मसालेदार, चटपटे और तले हुए आहार से बचना चाहिए। साथ ही योग और लम्बी श्वास की क्रियाओं का अभ्यास किया जाए तो अधिक और शीघ्र लाभ होता है।

उपरोक्त दी गई विधि से आवश्यकतानुसार दो -तीन महीने तक तुलसी का सेवन करने से सर्दी, जुकाम, साइनस, खांसी, पुराना से पुराना सिर दर्द, श्वास रोग, नेत्र रोग, पेप्टिक अल्सर, कब्ज, महिलाओं की अनेक बीमारियां, पुराना धीमा बुखार आदि कई रोग दूर होते है।

सावधानिया

– यदि गर्म प्रकृति वालो को अधिक मात्रा में तुलसी के पत्तों के सेवन से शरीर के भीतर जलन या चेहरे आदि पर गर्मी के दाने निकल जाए तो ऐसी स्थति में पत्तियों की मात्रा काम कर दे या बंद कर दें।

– तुलसी की पत्तियाँ इस्तेमाल करने से पहले स्वच्छ पानी से साफ कर लेना चाहिए।

तुलसी का पौधा अमृत के सामान है इसलिए इसे हर घर में अवश्य रखना चाहिए।

पीलिया (jaundice) लक्षण, परहेज —

पीलिया दूषित  पानी  b  पदार्थो के सेवन से होता हैं,  शरीर में पित्त  की अधिकता के कारण  भी होता हैं। 
पीलिया के लक्षण – 

पीलिया की  पहचान कैसे करें और पीलिया के रोगी  अपने भोजन में  क्या ले, क्या ना ले –

1 ) पीलिया में हल्का बुखार 99 से 100 तक बना रहता हैं।

2)  इस रोग में रोगी की आँखे, त्वचा, नाख़ून और मुँह  आदि हल्दी की तरह पीले हो जाते हैं। 

3) मूत्र  पीले रंग का आता हैं।b

4) शरीर में कमजोरी महसूस  होती हैं,  खाने में अरुचि होने लगती हैं। 

5) मुँह  सुखना,  मिचली, पेट फूलना, गैस  बनना,  कई बार खुजली  होना भी पीलिया  की निशानी हैं। 

6) पीलिया  के रोगी को चक्कर आना,  सिर में दर्द,  नींद की कमी जैसे भी लक्षण भी दिखाई  देते हैं।    

यदि इन सभी लक्षणों  में से कोई भी लक्षण किसी भी व्यक्ति  में दिखाई देते हैं तब डॉक्टर से जाँच  अवश्य  करवाए। 

पीलिया में क्या ना खाए –

1) पीलिया के रोगी को घी,  तेल,  हल्दी,  लाल मिर्च,  गर्म मसालों से बनी  चीजे,  अचार,  खट्टे पदार्थ  नहीं खाना चाहिए। 
 2)  पीलिया के रोगी को धूप में  घूमना, आग के पास बैठना,  परिश्रम के काम करना,  अधिक पैदल चलना और क्रोध,  तनाव से बचना चाहिए। 

3) अशुद्ध पानी,  अशुद्ध व बासी  खाद्य  पदार्थो का सेवन नहीं करना चाहिए। 

पीलिया के रोगी भोजन में क्या ले सकते हैं  – 

1) सब्जियों  में परवल,  चौलाई,  कच्ची मूली,  घीया,  तोरई,  टिन्डे,  आंवला,  टमाटर,  लहसुन  आदि लिया जा सकता हैं। 
2) मौसमी  फल जैसे पपीता,  चीकू,  खजूर आदि फल भी ले सकते हैं। 
3) पीलिया के रोगी के लिए कच्चा नारियल,  जौ  का पानी,  मीठा अनार का रस,  फटे दूध का पानी,  काली मिर्च व थोड़ा नमक मिलाकर पतली छाछ  पीना हितकारी हैं। 
4) रोगी को अच्छे से साफ गन्ने का स्वच्छता  से बनाया हुआ रस दिया जा सकता हैं। 
5) मूंग दाल  पानी या बिना मसाले  की मूंग की दाल में काला नमक व काली मिर्च मिलाकर भी लिया जा सकता हैं। 

6 ) मुनक्का या किशमिश  के 20 से 25 दानो को रात भर पानी में भिगोकर सुबह वही मुनक्का खाकर  ऊपर से वही पानी पी लेना चाहिए।  

पाठको से निवेदन हैं की उपरोक्त जानकारी का प्रयोग वे किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श के बाद ही करें।